कई नेताओं को सत्ता की कुर्सी पर बैठकर भारतीय राजनीती को अलविदा कह गए रामविलास पासवान

राम विलास पासवान का निधन
विनम्र श्रद्धांजलि

करीब पांच दशक तक भारत की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के बाद रामविलास पासवान अलविदा कह चुके हैं …केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक राम विलास पासवान का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार शाम निधन हो गया है । वह 74 के थे, पासवान ने दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने की। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ”पापा….अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं miss you papa
आपको बता दें की राम विलास पासवान का पिछले कई दिनों से दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल इलाज चल रहा था कुछ दिनों पहले ही उनका दिल का ऑपरेशन भी हुआ था । राम विलास पासवान पांच दशक से अधिक समय से भारतीय राजनीती राजनीति में थे और देश के जाने-माने दलित नेताओं में से एक थे साथ ही उन्हें दलितों का मसीहा भी कहा जाता था । पासवान भारत सरकार में उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्री थे।…

बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता रहे रामविलास पासवान को राजनीति का मौसम वैज्ञानिक भी कहा जाता था. उन्हें ये उपाधि बिहार राज्य के राजनेता व राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने दी थी. वह भारत के एक नहीं बल्कि 6 प्रधानमंत्रियों के साथ कार्य कर चुके हैं जिसमे वे वी पी सिंह, एचडी देवगौड़ा, आई के गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और अब नरेंद्र मोदी- की कैबिनेट में काम करने वाले रामविलास पासवान ने करीब बारह वर्षों तक बिहार और पूरे देश में गुजरात दंगों और उस समय गुजरात के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी और वर्तमान प्रधान मंत्री के ख़िलाफ़ जमकर प्रचार किया था. और अब वे उन्हीं की सरकार में मंत्री भी बने. लालू यादव और राबड़ी देवी को बिहारराज्य की सता से बाहर करने में भी पासवान की अहम भूमिका रही है….

रामविलास पासवान को ति का मौसम वैज्ञाराजनीनिक भी कहा जाता था
राजनीति का मौसम वैज्ञानिक

कहते हैं जिसने भूख को करीब से देखा हो और जिया हो वही भूख को और भूखों को बहुत अच्छी तरह समझ सकता है. कुछ ऐसे ही थे रामविलास पासवान. पासवान देश वो नेता थे जो फर्श से अर्श तक का सफर अपने बलबूते पर चढ़े. गरीब और दलित परिवार में जन्म लेने वाले रामविलास पासवान की ऐसी नेता बने जो देश के सर्वोच्च नेताओं की सूची में शामिल हो गए . पासवान हमेंशा उस वर्ग की बात करते थे जो गरीब और पिछडा हो. देश में कोरोना महामारी के दौरान गरीब मजदूर लोगों व राशनकार्ड धारकों को खाद्यन समेत अनेक परेशानियों से गुजरना पड़ा. इसको देखते हुए पासवान ने वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना को लागू किया था.. क्योंकि वह उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्री थे तो उन्होंने गरीब और राशनकार्ड धारकों के सामने आये इस संकट को देखते हुए इस योजना को योजना को लागू करने में अहम भूमिका है…

 

राम विलास पासवान का निधन
रामविलास पासवान और चिराग पासवान साथ में

पासवान खुद कभी किंग यानि की सत्ता की कुर्सी पर नहीं बैठ पाए लेकिन उन्होंने सत्ता के शीर्ष पर कई नेताओं को बैठते और उन्हें उसी कुर्सी से उतरते हुए भी देखा. वह दोस्त बनाने, और संबंधों में निवेश कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके लेकिन अपने पांच दशक से भी लंबे राजनैतिक करियर में उन्होंने कई लोगों को करने में भरोसा रखते थे और हाँ वह कभी-कभी वह खुद को झगड़ रहे गठबंधन सहयोगियों के बीच खरब हुए संबंधों को सुधारने और मजबूत बनाने वाले की तरह भी देखते थे. वह पुलिस की नौकरी को छोड़कर राजनीति सक्रिय हुए सन 1969 में कांग्रेस-विरोधी मोर्चा की ओर से पहली बार चुनाव मैदान में उतरे और पहली ही बारी में विधायक निर्वाचित होकर विधानसभा भी पहुँच गए . उन्होंने शुरुआत से देश की कई महत्वपूर्ण पार्टियों में रहते हुए कई विभिन्न पदों पर कार्य किये , समय के साथ-साथ बदलते उनके स्वरूप के साथ देश के महत्वपूर्ण दलित नेता बनकर उभरे. सन 1946 में बिहार के खगड़िया में जन्मे रामविलास पासवान आठ बार निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे और फिलहाल वह राज्यसभा के सदस्य थे.

 

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