जेसिका के मौत के दिन आखिर क्या हुआ था, कैसे हुई थी जेसिका की मौत

विकास यादव, जिसके पापा रसूख वाले थे. फोटो साभार: इंडिया टुडे आर्काइव जेसिका लाल मर्काडर केस की जब जब बात होती है तो एक रूह कपा देने वाली घटना सामने आती है. जहाँ एक बार में जेसिका की मौत ने पुरे देश को झकझोर कर रख दिया था. जेसिका का  जन्म 5 जनवरी 1965 को हुआ था. तब जेसिका घर चलाने के लिए मॉडलिंग किया करती थी .घटना की रात थी, 29 अप्रैल 1999 की , जगह क़ुतुब कोलोनेड के टैमरिंड कोर्ट रेस्त्रां . जहाँ पार्टी चल रही थी . रात का वक्त था जाम से जाम लग रहे थे. बगल में जेसिका लाल शराब बार के पीछे थी और साथ ही पार्टी में आये सभी लोगो को शराब सर्व कर रही थी. बार को बंद करने का भी टाइम था क्योंकि समय11.30 के करीब हो गया था..और शराब भी खत्म हो गयी. करीब बारह बजे मनु शर्मा अपने तीन दोस्तों के साथ जेसिका के पास आया और और शराब की मांग की. दोस्तों के नाम थे अमरदीप सिंह गिल, आलोक खन्ना, और विकास यादव. शराब खत्म हो गयी थी  तो जेसिका ने शराब देने से मना कर दिया. मनु शर्मा ने फिर उससे शराब की मांग की लेकिन जेसिका ने फिर मना कर दिया कहा की शराब खत्म हो गयी है. मनु ने फिर कहा और इस बार हज़ार रुपये तक देने की भी बात की. लेकिन जेसिका ने पहले की तरह ही मना कर दिया. इस बार जेसिका के मना करने पर मनु ने अपनी .22 कैलिबर की पिस्टल निकाली और उपर की छत पर फायर किया. जेसिका डरी नहीं शराब देने से मना कर दिया. फिर मनु की पिस्टल नीचे आई, और दूसरी गोली तेजी से जेसिका के सिर में लगी. जेसिका के बगल में खड़ा लड़का शायन मुंशी जोर से चिल्लाने लगा की “किसी ने जेसिका को गोली मार दी”. जिसके बाद भगदड़ मचने लगी और मनु और उसके दोस्त उस भगदड़ का फायदा उठा कर भाग गये. फिर जेसिका को अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन तब तक जेसिका दम तोड़ चुकी थी. जिसके बाद केस दर्ज किया गया पर बात यह थी की अगर आप किसी राजनेता या अमीर बाप की औलाद होते हो तो फायदे काफी है . मनु और उसके दोस्त भी बड़े परिवार से थे इसलिए केस भी बड़ा बनना तय था .  केस बना और केस आगे भी बढ़ा कोर्ट में सभी को पेश किया गया. लेकिन जब गवाह पेश होने शुरू हुए तब एक-एक करके वो सभी लोग जिन्होंने अपने सामने सब कुछ होते हुए देखा था और जो वहां के विटनेस थे. अपने बयान से मुकरते गए. वो कहते हैं न अगर आप किसी मंत्री या डॉन के बेटे हो तो आपका खौफ तो लोगो के अंदर तो होगा ही. वही हुआ सबकी गवाही के वक्त भी . विटनेस के अंदर भी अपना डर था. विटनेस बातो को घुमा कर बताने लगे और सच्चाई बताने से कतराने लगे. टर्निंग पॉइंट तो तब आया जब जेसिका के साथी जिसने शराब पेश की वही यू टर्न मार गया. उस ने कहा कि उसको हिंदी आती ही नहीं. उसने अंग्रेजी में बयान दिया था. और उसकी गवाही हिंदी में फाइल हुई थी. अब उसने अपने बयां में एक अलग ही कहानी जोड़ दी. उसने बयान में कहा कि. उस रात बार के काउंटर पर दो लोग थे जिन्होंने गोली चलाई. यानी दो गोलियां दो अलग-अलग लोगों ने चलाई. वही नहीं, एक एक करके उस रात मौजूद लोगों में जो आई विटनेस थे, तीन चार लोगों को छोड़कर सबने मनु को पहचानने से इनकार कर दिया. जिन्होंने मनु को अदालत के सामने पहचाना, वो थे:जो गवाह झुके नहीं. फोटो साभार: इंडिया टुडे आर्काइव

बीना रमानी- जिनकी पार्टी थी

मालिनी रमानी- बीना रमानी की बेटी

जॉर्ज मेलहॉट – बीना रमानी के कैनेडियन पति.

इसके बाद शायन मुंशी के बयान के बाद गोली की जांच रिपोर्ट में फेर बदल किया गया. क्योंकि केस किसी बड़े परिवार के उपर था तो केस को गलत साबित करने की कोशिशे चली और पुलिस ये साबित करने में नाकाम रही कि दोनों गोलियां एक ही पिस्टल से चली थीं. अब यहाँ ये बात भी अहम है की मनु का केस आखिर किसने लड़ा . तो मनु और उनके दोस्तों का केस राम जेठमलानी ने लड़ा था. जो सारे हाई प्रोफाइल केस लड़ते हैं. सुप्रीम कोर्ट में बड़े दबदबे वाले वकील हैं. अब दबदबे वाले वकील है तो रकम भी मोटी ही ली होगी केस के लिए. केस और खुला और विटनेस  बीना रमानी पर सवाल खड़े हुए की उनका बार इल्लीगल है क्योंकि उनके पास शराब सर्व करने का लाइसेंस नहीं था. लोअर कोर्ट में जज एस. एल. भयाना ने मनु शर्मा को बरी कर दिया था. अगली सुबह खबरे आई की no वन किल्ड जेसिका. देश में खबर आग की तरह फ़ैल गयी. सवाल उठा की अगर किसी ने जेसिका को नहीं मारा तो उसको किसने मारा आखिर कैसे हुई उसकी मौत. 2006 में ट्रायल कोर्ट ने सबको बरी किया. इसके बाद घटना पर मीडिया और आम लोगो ने कोर्अट के फैसले का जमकर विरोध किया.अब जेसिका के परिवार को पूरा सपोर्ट मिला. तहलका ने इस मामले में शायन मुंशी जिसने कोर्ट के सामने कहा था कि उसे हिंदी नहीं आती थी पर स्टिंग ऑपरेशन किया. स्टिंग ऑपरेशन यानी छुपे हुए कैमरे से बातें रिकॉर्ड करना. उनको देखना था कि शायन को हिंदी ढंग से आती भी है या नहीं. जहाँ तहलका के दो रिपोर्टर उसके पास हॉलीवुड के एजेंट बनके पहुंचे और कहा बड़ा प्रोजेक्ट लेके आये हैं. क्योंकि शायन खुद भी एक स्ट्रगलिंग एक्टर था. अब उसे हॉलीवुड से ऑफर मिला  रहा है तो मना करने की बात ही नहीं होती. रिपोर्टर्स ने शर्त रखी कि क्योंकि प्रोजेक्ट यहीं का होना था तो एक्टर को हिंदी आना जरुरी है . बीएस फिर क्या था. उसने फटाक से बोल दिया की हाँ मुझे हिंदी लिखनी , पढनी , और बोलनी आती है. अब उनके सामने शायन के असली रंग खुल गए. अब खबर छपी तो बवाल भी खड़ा हुआ और बवाल से प्रेशर में आकर दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में अपील की. चश्मदीद गवाह श्याम मुंशी ने अभी अपना सही बयान दर्ज कराया और 2006 को  हाई कोर्ट ने मनु शर्मा और उसके तीन दोस्तों को दोषी ठहरा दिया. मनु शर्मा को पूरी ज़िन्दगी जेल में बिताने की सजा मिली. पचास हज़ार का जुर्माना भी लगा. मनु शर्मा की कई अपीलों के बाद भी उसकी अपील को खारिज कर दिया गया. सिद्धार्थ वशिष्ठ को उर्फ़ मनु शर्मा को पूरी ज़िन्दगी जेल में काटने की सजा मिली. यह ऐसा केस था जहाँ मीडिया और देश की जनता ने जेसिका को न्याय दिलवाया. और उस कमजोर सिस्टम की हार हुई जिसमे हमेशा राजनीती के दबदबे और बड़े बाप की औलादे होने कारण लोग छूट जाते हैं. आज देश को सही मायनों में एक मजबूत सिस्टम की जरूरत है जहाँ सभी को न्याय मिले चाहे वो कोई भी हो .

 

 

 

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